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Sunday, 1 May 2016

उत्तर प्रदेश का एक उद्यमी प्रबंधक! - महेंद्र कुमार सचान

( लर्न आउट ऑफ़ द बॉक्स के कृष्णा कान्वेंट स्कूल से)

आनंद मिश्रा
(आनंद उत्तर प्रदेश में लर्न आउट ऑफ़ द बॉक्स प्रोग्राम सँभालते हैं)

महेंद्र कुमार बच्चों को पुरस्कृत करते हुए!
कृष्णा कान्वेंट स्कूल , जानकीपुरम, लखनऊ राज्य में स्थित है | आज से लगभग 50-60 वर्ष पूर्व इस इलाके में कुछ गिने चुने ही विद्यालय थे अतः बच्चों को विद्यालय जाने के लिए 20-25 km. की लम्बी दूरी तय करनी पड़ती थी जो कि अत्यंत कष्टदायक होती थी क्योंकि उस समय आने जाने के लिए यातायात के साधन भी उपलब्ध नहीं थे | जो विद्यालय थे भी उनमे शिक्षा प्रदान करने का स्तर भी अच्छा नहीं था | महेन्दर सचान भी इन सभी परिस्थितियों का सामना करते हुए आगे बढे और उन्होंने काफी कठिनाइयों का सामना किया | इसी के परिणाम की उपज कृष्णा कान्वेंट स्कूल है जिसका  मुख्य उद्देश्य यह था कि बच्चों को विद्यालय जाने के लिए ज्यादा दूरी न तय करनी पड़े और शिक्षा के स्तर में उत्तरोत्तर वृद्धि हो |

महेन्दर जी ने 1991 में बी. एस. सी. पास किया और 1993 में विज्ञान के अध्यापक के रूप में अध्यापन की शुरुवात की | साथ ही साथ बी. एड. तथा जी. डी. बम्बई से पूरा किया | विद्यालय की शुरुवात इन्होने पाँच सहायक अध्यापकों के साथ की विद्यालय में अध्यापको की नियुक्ति करते समय उनकी योग्यता का विशेष ध्यान दिया गया| 1997 में कक्षा –viii तक की मान्यता मिली हुई थी किन्तु बाद में 1997-98 में सोसाइटी रजिस्ट्रेशन प्राप्त हुआ और सन 2006 में हाईस्कूल एवं 2016 में इन्टर की मान्यताप्राप्त हुई |

प्रशंसा का  प्रमााढ पत्र !

विद्यालय में बच्चों के दाखिले को बढाने के लिए सह अध्यापकों और कुछ समाज के अनुभवी लोगों के साथ बैठकर एक सर्वे कराया गया और उसके माध्यम से यह पता लगाया गया की उस कम्युनिटी में लोगों का आर्थिक स्तर क्या है और सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार फीस तय की गई ताकि बच्चो के दाखिले में अभिभावकों को कोई ख़ास मुश्किल न हो| विद्यालय के प्रचार प्रसार हेतु सभी सहकर्मियों के साथ गृह संपर्क की योजना बनाई और घर –घर जाकर प्रत्यक्ष लोगों से संपर्क किया और शिक्षा के महत्त्व को समझाया | प्रति वर्ष कम से कम 100 नए क्षात्रों के प्रवेश का लक्ष्य तय किया गया | विद्यालय का सूत्र वाक्य “कर्म ही पूजा है “ को मुख्य आधार रखा गया | वर्तमान समय में कुल 22 सहध्यापक विद्यालय में कार्यरत है |

समय – समय पर विद्यालय में खेल कूद प्रतियोगिता के साथ ही साथ वाद-विवाद प्रतियोगिता का भी आयोजन चलता रहता है | क्षात्रों के ज्ञानवर्धन हेतु समय –समय पर ऐतिहासिक जगहों पर भ्रमण हेतु भी ले जाया जाता है जिससे उन्हें आंचलिक विज्ञान केन्द्रों और संग्रहालयों को भी देखने का अवसर मिल जाता है | गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे रास्ट्रीय त्यौहारों पर मेहमानों और अभिभावकों की उपस्थिति में बच्चो के उत्साहवर्धन हेतु उन्हें पुरस्कृत भी किया जाता है | बच्चों को पढ़ाने के लिए मात्र परंपरागत तरीकों को ही नहीं प्रयोग में लाया जाता वरन आधुनिक उपकरणों की सहायता से उन्हें और भी सहजता के साथ पढाया जाता है जो कि रोचक होने की वजह से बच्चों को जल्दी समझ में आ जाता है | शिक्षकों का भी समय – समय पर प्रशिक्षण कार्यशाला के द्वारा प्रशिक्षण कार्य को संपादित कराया जाता रहता है |

इस प्रकार महेंद्र जी शिक्षा के छेत्र में काफी नयी तकनीकियों से स्कूली छात्रों के बीच रुचि बनाए रखने में अव्वल रहे हैं जो की उनके स्कूल को कामयाबी की सीढ़ी पर ले जा रहा है|